क्या है सागर EVM कांड

 

अश्वनी मिश्रा की रिपोर्ट

भोपाल । सागर ईवीएम कांड में चुनाव आयोग ने पहले मामले को मामूली बताने की कोशिश की फिर जब बात नहीं बनीं तो नायब तहसीलदार राजेश मेहरा सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई। बता दें कि कांग्रेस ने इस मामले में सागर के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर आलोक कुमार सिंह को आरोपित किया है।

क्या हुआ था सागर में

मतदान दिनांक 28 नवंबर 2018 के 48 घंटे बाद बिना नंबर के वाहन में भरकर ईवीएम मशीनें लाई गई। पहले इनकी संख्या 45 फिर 113 बताई गई। कांग्रेस ने हंगामा किया तो मुख्य निर्वाचन पदाधिका​री वीएल कांताराव ने मामले को टालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ये खाली मशीनें हैं। कहा गया कि थाने में रखीं थी, वहां से लाई गईं हैं लेकिन मामला यहां शांत नहीं हुआ। सवाल उठते लगे तो चुनाव आयोग ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी

जांच पर भी उठ रहे सवालिया निशान

सागर के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने इस मामले की रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी। इसके बाद कमिश्नर मनोहर दुबे ने नायब तहसीलदार राजेश मेहरा को जिम्मेदार मानते हुए सस्पेंड कर दिया एवं उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

कांग्रेस ने कलेक्टर पर लगाए आरोप

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस ने लिखा है कि खुरई से भाजपा प्रत्याशी के रूप में प्रदेश के गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह चुनाव लड़ रहे हैं और सागर के जिला कलेक्टर निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार सिंह उनके नजदीकी है, जिसकी शिकायत कांग्रेस प्रत्याशी एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा दिनांक 30 नवंबर 2018 को की गई है कि उन्हें तत्काल चुनाव कार्यों से विमुक्त किया जावे। शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है, जो संदेह को जन्म देती है कि बडे पैमाने पर इवीएम मशीनों में हेराफेरी एवं छे़डछाड हो सकती है।

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