IT की रेड में खुलासा, टाइगर की खाल को टेबल क्लॉथ के रूप में किया जा रहा था इस्तेमाल

अश्वनी मिश्रा की रिपोर्ट

भोपाल:- मध्य प्रदेश में आयकर छापों की जद में आए अश्विन शर्मा के घर से वन्य प्राणियों की कई ट्रॉफी बरामद की गई हैं. वन्य प्राणियों के मृत शरीर को संरक्षित करके ट्रॉफी बनाई जाती हैं. आयकर व‍िभाग ने भोपाल में रव‍िवार सुबह 3 बजे अश्व‍िन शर्मा के घर पर छापा मारा था जहां से ये चीजें बरामद हुई हैं.


अश्विन शर्मा के घर से मिली ट्रॉफी में ब्लैक बक, सांभर, च‍िंकारा, टाइगर, चीता, ह‍िरण, चीतल की खाल शाम‍िल हैं. ये सभी जानवर संरक्षित वन्य प्राण‍ियों में आते हैं. ये खबर पता लगते ही वन व‍िभाग सक्र‍िय हो गया. वह मौके पर पहुंच गया है और इस बात की जांच कर रहा है क‍ि आख‍िर इतने सारे जानवरों की खालें अश्व‍िन शर्मा के घर कैसे आईं. इसके अलावा तीन अवैध हथियार भी म‍िले हैं. टाइगर की खाल को टेबल क्लॉथ की तरह इस्तेमाल क‍िया जा रहा था।

*बेहिसाब संपत्ति बरामद*

इसके अलावा भोपाल में अश्विन शर्मा और उसके र‍िश्तेदार प्रतीक जोशी के घर 1.46 करोड़ रुपये की नकदी और बरामद की गई। इससे पहले 9 करोड़ रुपये कैश प्रतीक जोशी के घर से बरामद हो चुके हैं। इनके यहां से दो दिन में कुल 10.46 करोड़ रुपये कैश बरामद हुआ है।

*8 लग्जरी कारें और कई फ्लैट मिले*

बता दें क‍ि मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के करीबी अश्विन शर्मा के पास प्लेटिनम प्लाजा में कई फ्लैट और आठ लग्जरी गाड़ियां मिली हैं. प्लेटिनम प्लाजा के चौथे और छठे फ्लोर पर शर्मा और उनके परिजन रहते हैं. पूरे प्लाजा में शर्मा की लग्जरी गाड़ियां चर्चा का केंद्र रहती हैं। उनके पास दो लैंड रोवर, तीन मर्सिडीज और तीन विंटेज कारों का कलेक्शन है।

*एनजीओ की आड़ में कई काले कारनामे*

अश्विन का ब्यूरोक्रेट्स में खासा दखल है. एनजीओ समेत कई काम हैं। अफसरों के कमरों में बेधड़क आना और जाना भी है। ऐसा कहा जाता है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी ये सक्रिय रहते हैं। प्रवीण कक्कड़ से इनका जुड़ाव है, अश्विन शर्मा 2005 से ही ब्यूरोक्रेट्स के बीच सक्रिय है। अश्विन के मोबाइल फोन में आईएएस अफसरों के वीडियो मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
अश्विन के प्रवीण कक्कड़ से पुराने रिश्ते हैं, वह कक्कड़ के पैर पड़ते हैं. कहा जा रहा है कि वह इनकम टैक्स का अच्छा जानकार है. अश्विन अपने एनजीओ आरोग्य जनकल्याण के काम के सिलसिले में अफसरों से मुलाकात करता रहता था। वर्ष 2016 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में एक ट्रेनिंग के लिए 50 करोड़ रुपए के भुगतान के मामले में भी यह एनजीओ विवादों में रहा है।