बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने एवं उनका सर्वांगीण विकास करने में शिक्षकों की महती भूमिकाः राज्यपाल माननीय सुश्री अनुसुईया उइके

Mp24 news देवेंद्र वर्मा की रिपोर्ट

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में सम्मानित किए गए 48 शिक्षक और 08 विद्यालय

छत्तीसगढ की राज्यपाल माननीय सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा है कि माता-पिता तो हमें जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक ही सहीं मायने में हमारे जीवन को गढ़ते हैं। हमारे गुरू हमारे चरित्र निर्माण कर हमारी अभिलाषाओं को आकार प्रदान करते हैं। शिक्षक ही बच्चों की रूचि को परख सकता है और उसी के अनुसार उनमें छिपी प्रतिभा को निखारकर उनका सर्वांगीण विकास करता है। यह विचार राज्यपाल सुश्री उइके ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किए। इस समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने की और विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम उपस्थित थे। इस राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में 44 शिक्षकों को 21-21हजार रूपए, शाल एवं श्रीफल और 04 शिक्षकों को प्रदेश के महान साहित्यकारों के नाम पर स्मृति पुरस्कार 50-50 हजार रूपए तथा उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में चयनित प्रत्येक प्राथमिक शाला को 10-10 हजार रूपए, पूर्व माध्यमिक और हाई स्कूल को 15-15 हजार और हायर सेकेण्डरी स्कूल को 25-25 हजार रूपए का पुरस्कार प्रदान किया गया।
राज्यपाल सुश्री उइके ने इस अवसर पर सम्मानित शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए अपने उन गुरूजनों का स्मरण कर उन्हें नमन किया, जिनसे उन्होंने शिक्षा ग्रहण कर आज वे इस मुकाम पर पहुंच सकी हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश और समाज के विकास में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने संत कबीर दास जी के दोहे ‘गुरू गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय, बलिहारी गुरू आपने जिन गोविंद दियो बताय’ को दोहराते हुए गुरूजनों की महत्ता व्यक्त की। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगौर, श्री अरविन्दो जैसे महान शिक्षाविदों ने शिक्षकों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। देश के पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान चिंतक, दार्शनिक और श्रेष्ठ शिक्षक भी थे और उन्होंने शिक्षा को एक मिशन माना था। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि देश के सर्वाधिक मेधावी व्यक्तियों को शिक्षक बनना चाहिए। राज्यपाल ने सैद्धांतिक ज्ञान के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान देने पर जोर दिया।

राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि दिनों दिन बढ़ते हुए प्रतिस्पर्धा के इस युग में अधिकांश मां-बाप अपने बच्चों से परीक्षा में अधिक से अधिक नंबर हासिल करने की उम्मीद रखते हैं और वे अपनी इच्छाओं को बच्चों पर थोपते हैं, लेकिन कोई बच्चों की रूचि को समझना नहीं चाहता है। शिक्षक ही बच्चों की रूचि को समझकर उनकी प्रतिभा को निखारने का प्रयास कर सकता है। उन्होंने शैक्षणिक कार्य में नवाचारों का प्रयोग करने की आवश्यकता व्यक्त की। शासकीय स्कूलों में भी ऐसा वातावरण तैयार हो कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने वालों में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों का प्रतिशत बढ़ सके। सुश्री उइके ने कहा कि आचार, व्यवहार एवं संस्कार के साथ जो विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करता है, वह अपने जीवन में बहुत उन्नति करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह धन है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता है और वो बांटने से और बढ़ता है। राज्यपाल सुश्री उइके ने शिक्षा के क्षेत्र में खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसके लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को बधाई दी।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के रूप में कार्य शुरूकर वे राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे। वे अच्छे शिक्षक, राष्ट्रनेता और दार्शनिक थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं और उन्हें गढ़ने का कार्य शिक्षक करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी युगों में गुरूओं का सबसे महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले से और बेहतर करने की चुनौती सभी शिक्षकों पर है। उन्होंने कहा कि आज यहां राज्यपाल के हाथों सम्मानित शिक्षकों का सम्मान शिक्षा जगत से जुड़े हर शिक्षक का सम्मान है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षक से कार्य शुरू कर राष्ट्रपति के पद पर पहुंचे और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके भी शिक्षक के रूप में कार्य शुरूकर राजभवन तक राज्यपाल के रूप में पहुंची हैं, इसके लिए उन्होंने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी।
इस समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने आज सम्मानित सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए वर्ष 2019 के लिए राज्य शिक्षा पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों की घोषणा की। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री गौरव द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज यहां शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों का किया गया सम्मान प्रदेश के दो लाख से अधिक शिक्षकों का सम्मान है। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस मौके पर राज्यपाल के सचिव श्री सुरेन्द्र कुमार जायसवाल और सम्मानित किए गए शिक्षक तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। अंत में लोक शिक्षण संचालक श्री एस. प्रकाश ने आभार प्रदर्शन किया।