हाईकोर्ट के आदेश और राजपत्र में प्रकाशन के बाद भी छपारा को नहीं मिला नगर परिषद का दर्जा

हाईकोर्ट के आदेश और राजपत्र में प्रकाशन के बाद भी छपारा को नहीं मिला नगर परिषद का दर्जा

छपारा में नगर परिषद की जगह पंचायत के चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता में आक्रोश

हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना

नगर संघर्ष समिति ने खोला मोर्चा

अश्वनी मिश्रा की खास खबर

सिवनी/छपारा – भाजपा शासनकाल में 4 वर्ष पहले छपारा को नगर परिषद बनाये जाने के लिये राजपत्र में प्रकाशन होने के बाद छपारा में नगर परिषद चुनाव संपन्न कराने के लिये 3 ग्राम पंचायतों को समायोजित कर बकायदा वार्डो का सीमांकन करते हुए 15 वार्ड भी बनाए जा चुके थे। लेकिन अब पुनः छपारा में ग्राम पंचायत चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के नये आदेश के बाद जनता में आक्रोश पनपने लगा है।
उल्लेखनीय है कि 20 हजार से अधिक आबादी वाले छपारा नगर को पिछले 15 वर्षों के अधिक समय से नगर परिषद बनाए जाने के लिए कई बार धरना, आंदोलन और ज्ञापन पत्रों के माध्यम से शासन प्रशासन का ध्यान लगातार आकर्षित कराया जा रहा था। नगर संघर्ष समिति के द्वारा वर्ष 2014 में छपारा नगर को स्वैच्छिक बंद का व्यापक रूप से समर्थन मिलने के साथ-साथ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और बैनगंगा नदी में जल सत्याग्रह भी किया गया था। जिसके पश्चात भाजपा शासनकाल में 4 जनवरी 2016 को छपारा को नगर परिषद बनाए जाने के लिए राजपत्र में प्रकाशन भी हो चुका था।

वार्डो का परिसीमन और नामकरण भी हो चुका था

बता दें कि 4 जनवरी 2016 राजपत्र में छपारा नगर को परिषद बनाए जाने के प्रकाशन के बाद 17 मई 2019 को जिला कलेक्टर के आदेश पर एक दल गठित किया गया था जिसे छपारा नगर परिषद में समायोजित 3 ग्राम पंचायतों के वार्ड सीमांकन और आरक्षण की प्रक्रिया संपन्न कराने के आदेश दिए गए थे। आदेश के परिपालन में 5 माह बाद 17 अक्टूबर 2019 को कलेक्टर के आदेश से वार्डो का सीमांकन किया जाकर छपारा नगर परिषद के लिए 15 वार्ड भी बना दिए गए थे और इन वार्डो का बकायदा नामकरण किया जाकर प्रकाशन भी हो चुका था। एक वर्ष पहले तक छपारा नगर वासियों को ऐसा लग रहा था जैसे अब छपारा में नगर परिषद चुनाव ही संपन्न होंगे। लेकिन ठीक इसके विपरीत 12 जून 2020 को सिवनी कलेक्टर के आदेश के बाद पुनः अब छपारा में ग्राम पंचायत चुनाव प्रक्रिया सहित आरक्षण प्रक्रिया संपन्न कराने के आदेश के बाद छपारा की जनता में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस जन हितेषी मुद्दे को लेकर नगर संघर्ष समिति छपारा के द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से शिवराज सरकार और प्रशासन को छपारा को नगर परिषद बनाए रखने और चुनाव संपन्न कराने के लिए कई तरह के अभियान की शुरुआत भी की जा चुकी है। इसी कड़ी में 15 जून दिन सोमवार को छपारा रेस्ट हाउस में एक विचार गोष्ठी भी आयोजित की जाकर मुख्यमंत्री के नाम छपारा तहसीलदार को ज्ञापन सौपे जाने की भी तैयारी चल रही है।

हाई कोर्ट भी दे चुका है आदेश

छपारा नगर के जागरूक नागरिक मदन श्रीवास्तव के द्वारा वर्ष 2009 में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की जा कर छपारा को नगर परिषद बनाए जाने के लिए पिटीशन दायर की गई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने भी सारे तथ्यों को ध्यान में रखते हुए छपारा को नगर परिषद बनाए जाने के लिए मध्यप्रदेश शासन को आदेश भी जारी किए जा चुके हैं।

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